चारधाम मंदिर
स्वामी शांतिस्वरूपानंद गिरि बहु प्रतिभाशाली संत है। तपोनिष्ठ ब्रह्मलीन स्वामी अखंडानंदजी महाराज ने भूतभावन भगवान महाकाल की धरा पर अखंड आश्रम की स्थापना कर सनातन संस्कृति को जन जन तक पहुंचाने का प्रकल्प रखा था। उनके परम स्नेही शिष्य महामंडलेश्वर युगपुरूष स्वामी परमानंदजी महाराज ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। परमानंदजी के शिष्य के रूप में शांतिस्वरूपानंदजी ने इसका विस्तार कर उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं को चारधाम मंदिर की सौगात दी।
अखंड आश्रम से लगा चारधाम मंदिर उज्जैन के दर्शनीय स्थलों में आकर्षण का केंद्र है। रोज हजारों श्रद्धालु यहां जगन्नाथ धाम, बद्रीनाथ धाम, द्वारका धाम और रामेश्वर धाम में दर्शन कर चारधाम की यात्रा का पुण्य अर्जित कर धन्य होते है।
चारधाम मंदिर....जहां होते हैं, जगन्नाथ धाम, बद्रीनाथ, द्वारका धाम और रामेश्वर धाम के दर्शन
महाकालेश्वर मंदिर के पीछे रूद्रसागर के पास स्थित अखंड आरम के महामण्डलेश्वर श्री स्वामी शांतिस्वरूपानंदगिरिजी महाराज ने उज्जयिनी में चारधाम मंदिर की स्थापना की। यहाँ पर बद्रीनारायण, जगन्नाथाधाम, द्वारिकाधाम एवं रामेश्वरधाम की स्थापना की है। जो तीर्थ यात्रा अपनी शारीरिक, आर्थिक एवं अन्य कारणों से चारधाम तीर्थ की यात्रा करने में असमर्थ रहते है, उनके लिये मोक्षदायिनी नगरी में चारधामों के विग्रह की प्रतिकृति के दर्शन लाभ से चारधाम यात्रा का पुण्य प्राप्त होता है।
मंदिर परिसर में दर्शनार्थियों के लिये एक गुफा में विद्युत चलित झाकियों में बालकृष्ण की लीलाओं की स्थापना की गई है। चारधाम का यह मंदिर अपने शिल्प, सौन्दर्य एवं कलात्मकता के लिये अपना एक विशेष आकर्षक रखता है। प्रवेश-द्वार के दोनों ओर सुन्दर एवं मनोरम उद्यान वाटिका बनी हैं दाई ओर पन्द्रह फीट ऊँचा एक कलश बना है, जिसके मुँह पर कमल की पंखुरियाँ है तथा इस पर भगवान शंकर की नीलवर्ण हालाहल-पान करती हुई चार फीट ऊँची मनोहरी मूर्ति विराजित है। परिसर में चालीस कमरों की एक सुसज्जित यात्री निवास, कार्यालय, साधु-संतों के आवास, भोजनशाला, अतिथिकक्ष एवं स्वामीजी का आवास सुव्यवस्थित सौंदर्यपूर्ण ढंग से निर्मित किया गया है। 18 अक्टूबर 2004 को यहाँ गौशाला लोकार्पित की गई है। स्वामी अखण्डानंदजी महाराज के मंदिर में उनकी मूर्ति विराजित है। ब्रह्मलीन स्वामी जगदीशानंद जी एवं ब्रह्मलीन स्वामी दर्शनानंदजी की समाधि भी बनी हुई है।
वैदिक ज्ञान परम्परा की धारा को निरन्तर प्रवहमान बनाये रखने के लिये स्वामी अखण्डानंद वेद विद्यालय की स्थापना की गई है, जहाँ लगभग चालीस बटुक कर्मकाण्ड एवं वेद की शिक्षा सुयोग्य आचार्यो के मार्गदर्शन में विद्यार्जन कर संस्कारित बन रहे है। साथ ही यहाँ चारधाम विद्यापीठ की स्थापना भी की गई है, जिसमें सी.बी.एस.सी. पाठ्यक्रम अनुसार विद्यार्थियों को अधुनातन शिक्षा दी जा रही है। मंदिर परिसर में सत्संग हेतु साढ़े सात हजार वर्ग फीट का एक प्रवचन हाल निर्मित किया गया है। देश-विदेश के साधु-संतों के लिये आवास एवं भोजन की व्यवस्था भी सुचारू ढंग से संचालित की जा रही है। आपके सुयोग्य मार्गदर्शन में अखण्ड आश्रम ट्रस्ट की गतिविधियाँ न्यासीगण, सदस्यों एवं जनसहयोग से उत्तरोत्तर विकास के नये सौपान पार करती हुयी अविराम गतिशील है।
विलक्षण प्रतिभा के धनी, आलौकिक गुणों से सम्पन्न एवं श्रेष्ठ कथाकार महामण्डलेश्वर श्री स्वामी शांतिस्वरूपानंदजी महाराज सनातन परम्परा के संवाहक के रूप में भारत के अनेक प्रांतों में श्रीमद्भागवत कथा, राम कथा एवं प्रवचनों के द्वारा मानवता, भारतीय, संस्कृति, सभ्यता एवं संस्कारों के संवर्धन हेतु कर्मरत है। आपका अध्यात्मज्ञान, साधना, वार्ताएँ, संवाद एवं गायन श्रोताओं में आनंद की अभिनव सृष्टि निर्मित कर देता है। स्वामीजी की सुमधुर वाणी, चिंतन, मधुर व्यवहार, ध्यान साधना, प्रवचन वं अनुष्ठान के द्वारा समर्पित भाव से कर्मरत रहकर जन-जन के मन में भारतीय संस्कृति के मूल्यों को स्थापित करने सेवारत रहकर राष्ट्र को गौरान्वित कर रहे है।
